April 1, 2011

ऐ दुनिया, अपनी दुनिया ले जाओ...

हवा में तपिश थी और कई दिनों से मौसम थके हुए सरकारी हरकारों की तरह उखड़े हुए जवाब देने लगा था. कहवाघर के मालिक ने अपने कान को खुजाने के लिए अंगुली को सीधा किया तो उसकी आँख किसी यन्त्र की तरह बंद होने लगी यानि जब अंगुली ठीक कान को छू गयी उसी समय एक पलक बंद हुई. नसरुद्दीन की नज़र तीसरे घर के मेहराब से टकरा रही थी और गधा थका हुआ सा उदास बैठा था. अपने दाई तरफ करवट लेते हुए गधे ने कहा. वे अगर क्रीमिया में युद्ध के सिपाही न बने होते तो क्या वार ऐंड पीस नहीं लिखते ?

नसरुद्दीन ने जवाब नहीं दिया. वह अक्सर ऐसा ही करता है. उसका मानना है कि अपनों का कहा हुआ सुनने के लिए होता है, जवाब देने के लिए नहीं. इसलिए उसने एक प्यार भरी निगाह मात्र डाली. गधे ने उसी करवट के एंगल में थोड़ा सा उठाव लाते हुए किसी ज्ञानी की तरह एक साँस भर का मौन धारण किया और कहने लगा.

रात, मैंने एक सपना देखा. उस सपने का भूगोल कई सपनों में पहले भी देखा हुआ है यानि इसी सपने को मैंने कोई पांचवीं बार देखा. एक तीन मंजिला दुकानों वाली बिल्डिंग है. उसमें से एक पतला सा दरवाज़ा किसी होटल में ले जाता है. वहां सीलन भरे कमरे और एक बड़ा खुला हाल है. अपने कमरे से बाहर देखो तो लगता है कि सड़क पर गिरने वाले हैं. इस बिल्डिंग के आगे बहुत ही चौड़ी सड़क नुमा खुली जगह है जैसी रोमन नृत्य शालाओं के आगे हुआ करती है. मैं उस जगह से होता हुआ हमेशा उत्तर-पूर्व की दिशा में जाता हूँ. कुछ ही दूरी पर रास्ता ख़त्म होकर नीचे उतरने वाली सीढियों में तब्दील हो जाता है.

इन सीढियों के पास जाते हुए ऐसा लगने लगता है कि मैं खो गया हूँ. कई बार ख़याल आया कि वे सीढियाँ किसी अंतिम फैसले वाली जगह की ओर जाती है. यह विचार मुझे भय से भर देता है. इस सूनी जगह पर सीढियों से पहले पत्थर की एक लम्बी रेलिंग लगी हुई है. उसको देखने से आभास होता है कि कोई नदी या बड़ा झरना उसके नीचे से गुजरता होगा, हालाँकि मैं कभी वहां तक गया नहीं और हर बार मेरा सपना यहीं टूट गया. सपने से आधे जगे हुए खुद का हाल कुछ ऐसा पाया कि निर्जन प्रदेश में समय ठहर गया है और बेरहम मृत्यु अकेला छोड़ चुकी है. किसी प्रिय की अनुपस्थिति में आँखें भीगी हुई है और मार्मिक पुकारें गले में घोंट दी गयी है.

नसरुद्दीन ने पूछा कि इस सपने का टाल्सटॉय से क्या सम्बन्ध है ?
गधे ने कहा कि इस सपने का सम्बन्ध तो सोफ़िया आन्द्रीवना से भी नहीं है. रैल्फ कडवर्थ, क्लार्क, शेफ्ट्सबरी और ब्रीड्ले से भी नहीं है. शराब का पीपा लिखने वाले एडलर एलन पो और रेतीले मैदानों में एक अकेली सुंदरी के इर्द गिर्द रहस्य गढ़ने वाले राबर्ट लुई स्टीवेंसन से भी नहीं है. आत्मा से गुलाम लोगों की कथा लिखने वाले हंगरी के कथाकार ज़ोल्तान सितन्याई से भी नहीं है. ऐसा कहते हुए गधे का गला भर आया था. वह रो रहा था या हांफ रहा था, कहना मुश्किल था. गधे ने आगे कहा कि सब गधे भी एक से नहीं होते. सबके सुख और दुःख अलग होते हैं और कोई किसी को समझ नहीं सकता...

नसरुद्दीन चुप बैठा था कि ईरान में बेसतून पहाड़ को काटते समय फ़रहाद को न पत्थर दिखता था न दूध की नदी. उसकी आँखों में बस एक शीरीं थी. पास ही कहीं इब्ने इंशा की ग़ज़ल बज रही थी, कल चौदहवीं की रात थी...

दो अश्क़ जाने किसलिए पलकों पे आके टिक गए
अल्ताफ़ की बारिश तेरी इक़राम का दरिया तेरा !

No comments:

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.