November 15, 2015

बड़ी तकलीफ़ की छोटी कहानियां

रात आहिस्ता सरकती रहे मगर मन और दिमाग ठहरे रहें, एक ही बात कि तुम कब तक अपने आपको सताओगे. कब तक पागलपन के झूले पर सवार रहोगे. कोई दिन आएगा? जब ज़रा सा खुद का फेवर करोगे, बिना किसी को सताए हुए. मन को कुछ समझ नहीं आता. वह बस इसी एक बात पर सहमत होता है कि फिलहाल चुप रहो कि तुम समझ चुके हो चीज़ें सरल नहीं है. इसलिए प्लीज एक बार अपना फेवर करो कि तुम वह कर चुके हो जो किसी चीज़ को टूटने से बचाने के लिए तुम्हारे लिए ज़रूरी था. वह आवाज़ तुम दे चुके हो, जिसे देना तुम्हारी ज़रूरत थी. अब तुम खुद को हर बात के लिए माफ़ कर दो. यही सब सोचते हुए कुछ एक सच्ची और तकलीफ़ भरी बातें लिखीं. आप इन्हें सच समझें या कहानी इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. इससे फर्क पड़ता है कि अपने आस पास के धोखों को जल्दी पहचानना सीखना. ताकि आप गहरे दुःख से तब बाहर आ सको जब आने का अवसर हो न कि तब जब आपकी ज़रूरत हो. 
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हमारे घर में चार कमरे हैं और वहां हम दो लोग रहते हैं. मुझे बहुत डर लगता है.
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जब उसने मुझे ये बात बताई कि मैं जिससे प्रेम करती हूँ वह किसी और के साथ घूम रहा है, तब मैंने उसे झिड़क दिया था. मैंने इससे बड़ी भूल कभी नहीं की. 
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मेरे कुलीग फिजिकल टीचर ने मेरा शारीरिक शोषण किया था. मैंने अठाईस साल तक अकेले जीवन जीया था. बाद में घर वालों ने जबरन मेरी शादी तय कर दी. जब मैं नए घर में गयी तो मेरे लेक्चरर पति ने मुझसे कहा- वे बारहवीं में पढने वाली एक लड़की के साथ सम्बन्ध में हैं. 
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वह नवनियुक्त आईपीएस था. मैं उसे कॉलेज के दिनों से जानती थी. मैंने उससे कहा कि मुझे सिविल सर्विस की तैयारी में मदद कर दो. वह अक्सर मदद करने आता था. मैं इस काम से उकता गयी. आखिर मैंने तय किया मैं मर जाऊं.
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एक रोज़ माँ को पिताजी ने बहुत मारा. मैंने अगली सुबह शादी के लिए हाँ कर दी. 
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वह उसके ठीक सामने कार से उतरते हुए, उसे फोन पर कह रही थी. भीड़ बहुत है, मैं पैदल चलकर आ रही हूँ. तुम कहाँ खड़े हो? 
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वह एक रात मेरे पाँव के नाखून चूमता रहा. उसने कहा कि ये रंग बहुत प्यारा है. मुझे उसी रात उसे छोड़ देना चाहिए था. 
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उसे नहाने की आदत थी. वह अक्सर वाशरूम में बहुत देर तक नहाता था. मुझे उसे कहना चाहिए था कि अब बस. 
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उस शाम जब मैं घर पहुंची तब वह सब्जी बनाने की तैयारी कर रहा था. मैं जिस टूटन से भरी घर आई थी, उसे ऐसा करते देखकर और ज्यादा टूट गयी. 
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ये उस क्रीम की गंध नहीं थी, जो हमारे घर में रखी रहती थी. 
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मैं एक डरपोक हूँ. काश उसे कभी कह सकती कि उस रात तुमने मुझे क्या कहकर बुलाया था.
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गले में स्कार्फ बांधे देखकर सहपाठी ने कहा- डू यू हैव बॉय फ्रेंड. उसने जवाब दिया- नो, आई एम मेरिड. उनके सामने एक मॉडल पीठ किये थी. वह उसकी पीठ को देखने लगी. 
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अब ये रोज़ होने लगा कि वह खाने की थाली को दूर सरका देता. बुरा सा मुंह बनाता और घर से बाहर चला जाता था. 
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क्या तुम समझ नहीं सकते कि मुझे आज ही मिसकेरेज हुआ है इस हाल में किसी पार्टी में नहीं जा सकती हूँ. उसके पति ने कहा- मैं कुछ नहीं कर सकता, ये बात तुम जानो और माँ जाने. 
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मेरे एक बच्ची नहीं होती या मेरे पास कोई नौकरी होती तो मैं नरक से बहुत पहले बाहर जा चुकी होती. 
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वह मेरा एटीएम कार्ड अपने पास रखता है. 
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मुझे मालूम है कि वह क्या कर रही है. ईश्वर उसे दंड देगा.
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उसने मेरा हाथ बदतमीजी से पकड़े रखा. वह कह रहा था- हमारी शादी होने वाली है. जब मैंने ये बात माँ को बताई तो उन्होंने कहा कि इस उम्र में ऐसा होना कोई अजीब बात नहीं है. मुझे दुख है कि माँ ने मुझसे झूठ बोला था. 
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[Painting Image : Luqman Reza Mulyono]

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.