June 29, 2017

अपने जानने से परे

बारिश के इंतज़ार में कभी बारिश आ जाती है। हम बीज बोने के बाद नन्हे पौधे की प्रतीक्षा करते हैं। एक दिन वहीं टहनियां बन जाती हैं। हम सोचते हैं फूल खिल आएं। किसी सुबह कोई फूल खिला होता है। कभी हम सोचते हैं कि ज़िन्दगी गुज़र जाए तो अच्छा। एक रोज़ पाते हैं कि ज़िन्दगी गुज़र चुकी है। हम सचमुच जानते हैं कि क्या होना है। हम बस अपने जानने को मानना नहीं चाहते।

जीवन की दिव्य दृष्टि के समक्ष हमारा ज्ञान सबसे बड़ी बाधा है।
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सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.