July 14, 2017

अक्सर

दोपहर का स्वप्न 
साँझ की आहट से टूट जाता है. 

किसी फूल के कान में 
स्वप्न टांकते हुए सांझ ढल जाती है. 

रात का पहला पहर 
अभी बीत रहा होता है 
घने अंधरे में अचानक लगता है 
कि उस फूल की आँखें 
ठीक सामने चमक रही है. 

एक चौंक उतरती है. 

हाथ बढाकर देख लूँ कि वह है? 
मगर जो हाथ बढ़ा नहीं 
उसमें एक लरज़िश है.

कभी-कभी नींद के स्वप्न 
और जाग के स्वप्न के बीच के 
फासले पर धुंध उतर आती है.

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.