September 13, 2017

किमाम लगी सिगरेट

किताबें धुएं से भरी रहती। आंगन पर राख बिखरी रहती।

आलों में और चारपाई पर सड़े हुए गले की तस्वीर के साथ केंसर की चेतावनी छपे खाली-भरे पैकेट पड़े रहते। तंबाकू की बासी गन्ध हर दीवार से चिपकी रहती और खिड़कियों के रास्ते रिसती जाती। मुंह का कसैले स्वाद से पुराना परिचय था। मगर एक लकीर के आगे धुआं असर खो देता। केवल तलब बची रह जाती है। जैसे सांकल में खुद अपना पैर रखा है और घसीट रहे हैं।

जैसे दसों दिशाओं से प्रेम में लिपटे रहने पर भी सुकून नहीं आता। बार-बार चाहना से भीगे कोड़े को अपनी पीठ पर फटकारने से आवाज़ तो आती मगर क़रार न आता। ऊब बढ़ती जाती। प्रेम किये दुःख होय की चेतावनी भूलकर प्रेम में ही रम जाने के बाद सहसा कभी बेदिली होती ही है। बेअसर रिश्ते को ढोते हुए एक रोज़ ऊब जाते हैं। हम उसे एक तरफ रख देते हैं।

दो चार दिन में ही तम्बाकू की गंध किताबों, दीवारों और खिड़कियों को छोड़कर चली जाती है। ऐसे ही किसी और से चाहा प्रेम भी एक रोज़ चला जाता है। हम एक खुली सांस लेते हैं।

जो अपने भीतर उपजे और दूजे पर आश्रित न हो वही प्रेम रखना।

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.