March 1, 2018

किसी और के बारे में



धुएं से बनते बेतरतीब रास्तों पर चलते हुए भटक कर नज़र दीवार की ओर जाती थी। कभी उसके आस-पास रहते हुए भी उसकी याद आ जाती थी। कभी छाया भरे अनजान रास्ते पर मन अकेले चल पड़ता। कभी रेत के जंगल में क्षितिज पर कोई लाल रंग डूबता हुआ गाढ़ा हो जाता। इस कभी-कभी से मन सदा डरता रहा। बेचैनी को मिटाने का कोई इरेजर न बनाया जा सका। बस अक्सर यही चाहना रही कि तुम इत्ते करीब रहो कि हम एक दूजे को देख भी न सकें।

इंस्टाग्राम के फेरे में वी के एकाउंट में ये बेवजह की बात मिली. 

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सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.