April 9, 2018

एक रूमानी चीज़

अतीत बुझी हुई, मिटी हुई या गुज़री हुई बात नहीं है। वह हमारे साथ चलता है ठीक हमारे पीछे।

आज सुबह स्वप्न में पिताजी को देखा। उनके साथ हमेशा दो दोस्त होते थे। स्वप्न में भी थे। उनसे बाइक स्टार्ट नहीं हो रही थी। मैं दूसरी कोशिश में उसे स्टार्ट कर देता हूँ।

जैसे प्रेयसियां अतीत हुई, जैसे पिताजी अतीत हुए ठीक उसी तरह आँख खुलते ही स्वप्न अतीत हो गया।

अगर मैं अतीत के दरिया में छोटी डोंगी लेकर उतर सकूँ तो मिल सकता हूँ बेहद हसीन लोगों से। देख सकता हूँ उनकी प्यार भरी आंखें। महसूस कर सकता हूँ कच्ची बाहों के घेरे। होठों पर उतार सकता हूँ गुलाबी सितारे। अपने कंधों को पा सकता हूँ मादक गन्ध से भरा हुआ।

अतीत भी एक रूमानी चीज़ है।
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सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.