June 4, 2018

तुम्हारी नियति


ये ज़रूरी नहीं है कि
काग़ज़ के फूल काग़ज़ से ही बने हों।

ताज़ा फूल थे। महकते, लुभाते फूल। गमले में रख दिए।
हवा ने या वक़्त ने उनकी नमी सोख ली। उन सूखे फूलों को देखकर लगता था कि वे काग़ज़ के फूल हैं।

अचानक हाथ सूखे फूलों के गुच्छे पर गया तो काग़ज़ की छुअन महसूस हुई। काग़ज़ सी आवाज़ आई। वे फूल अगर छांव में न रखे होते तो धूप में काग़ज़ की तरह जल सकते थे।

प्रेम भी एक दिन सूखा हुआ काग़ज़ फूल हो जाता है?

नहीं। तुमने कभी देखा है कि तितली, भँवरे, चिड़ियाँ किसी मुरझाए फूल के पास उदास बैठी है? नहीं न। तितलियां और पंछी जानते हैं कि फूलों का काग़ज़ हो जाना, प्रेम का स्मृति में ढल जाना नियति है। इसलिए नए फूल तक उड़ो।

तुम्हारी नियति एक नये क्षण की ओर चलते जाना।

छीजने की आहट

मन एक तमाशा है  जो अपने प्रिय जादूगर का इंतज़ार करता है। शाम से बालकनी में बैठे हुए सुनाई पड़ता है। तुम कितने कोमल हो सकते हो? खुद से पूछने पर...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.