July 3, 2018

बाक़ी कामों से भरी जिंदगी




ज़िन्दगी में काम पेंडिंग पड़े रहें इससे अच्छी बात सिर्फ एक ही होती है कि उन कामों को भुला ही दिया जाए। काम पूरे हो जाएंगे तो क्या करेंगे? लेकिन मन कई बार होता है कि कुछ काम पूरे कर लिए जाएं। उन कामों में लगते ही कुछ रोज़, कुछ घण्टे या कुछ ही देर में मन उचट जाता है।

हर काम के होने का कोई मतलब होता है। जैसे कुछ काम पेंडिंग होने को ही होते हैं। कुछ कभी न होने के लिए होते हैं।

कुछ किया, कुछ न किया। ज़िन्दगी चलती रही। फेसबुक को फोन से नहीं हटाया, मन से हटा दिया। क्या हमारे समय का इतना सा मोल रह गया है कि स्क्रॉल करें, अपडेट करने को सोचें या फिर इनबॉक्स किये जाएं। असल में फेसबुक ज़िन्दगी की एक बहुत मामूली सी बात है। ज़िन्दगी का विस्तार इतना है कि हम अचरज भरे उचक सकते हैं, चौंक कर ठहर सकते हैं या फिर कुछ न करने के परमानंद को पा सकते हैं।

अब बस मेल पर बात कर लेना ठीक लगता है। और कहने सुनने लायक बात हो तो फोन पर कर लेता हूँ। मेल का पता yourkc@yahoo.com हैं। यहीं से सब बातें हो जाती हैं।

आज लोक संगीत रिकॉर्ड कर रहा था। मुल्तान ख़ाँ साहब ने नौजवानी भरा गीत गाया। मैं उनको कहने लगा कि आपको कौन कहेगा कि दिल के दो झटके लगे हैं। असल में आज आप दिलों को झटके दे रहे हैं। इसके बाद मैं फोन लेकर स्टूडियो में गया और कहा- "आपको आज अपने फोन में दोस्तों के लिए सहेज लूँ।" उन्होंने कहा- "हमें भी दिखाना" इस बात पर ख़याल आया कि पेज पर शेयर कर आता हूँ।

भपंग पर रौशन, ढोलक पर सवाई, खड़ताल भुंगर ख़ाँ, गायक मुल्तान ख़ाँ और उनका गायन में सहयोग जेते ख़ाँ कर रहे हैं। ये किसी रिकॉर्डिंग का हिस्सा नहीं है मेरे अनुरोध पर गाया है।

इन मीठे प्यारे कलाकारों का शुक्रिया। ❤

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.