January 9, 2019

कोई भी नहीं लौट सकता

मैं बैठ जाता तो 
मेरे भीतर के आदमी को बेचैनी होने लगती। 
इसलिए मैं उठ जाता। 
बहुत दूर साथ साथ चलने के बाद 
मैं थकने लगता लेकिन भीतर का व्यक्ति 
मेरी थकान से अचरज में पड़ जाता।

आखिरकार दिवस की समाप्ति पर 
मैं देखता कि इस तरह बेचैन होकर चलने से क्या मिला? 
तब मेरे भीतर का व्यक्ति सर झुकाकर बैठ जाता। 

वह कनखियों से कभी-कभी मुझे इस तरह देखता 
जैसे कह रहा हो, उस पल वहीं रुक जाते तो अच्छा था।

हम दोनों उस पल तक लौट नहीं पाते। 

कोई भी नहीं लौट सकता। वह केवल एक स्मृति या छवि में देखा जा सकने वाला पल रहा जाता है।

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.