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तुम जो मिलोगे इस बार तो

तेरे बाद की रह जाणा

ढब सब उलटे पड़े हो जहां

स्थायी दुःख से कैसलिंग

नासमझी के टूटे धागों में

सुनो [जा]ना, व्यर्थ अभिमाना- 2

कहाँ है तुम्हारी प्रेमिका

सुपना ऐ सुन

जून के सात दिन-रात

कॉलर पर टँगा सफ़ेद ईयरफोन

ओ मुसाफिर ! ये बस पीले और टूटे पत्ते भर हैं