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क्या होगा सोचकर

याद करते हुए एक बरस

जोगी ही बन जाएँ मगर

उसकी आमद का ख़याल

तुम्हारे लिए हमेशा

प्रिय को बदलते हुए देखकर

इतवार का स्वाद