February 17, 2011

पलकन की चिक डाल के साजन लेऊं बुलाय

एक ही बहाने को कई बार उलट पुलट कर देखा और समेट कर वैसे ही रख दिया. वो खुशबू जो भीगे मौसम का आभास देती थी, अभी तक मेरे कमरे में बसी हुई है. फरवरी में भी बारिशें गिर रही हैं. यकीन नहीं होता कि उसी रेगिस्तान में रह रहा हूँ जिसने आसमान को तकते हुए कई बरस सूखे गुज़ार दिये थे. बेवक्त आँखें उदास हो जाती है और पिछले पल सुनी गई आवाज़ की स्मृतियां बरसों पुरानी लगने लगती है. सुबह जागते ही रोजनामचा खुल जाता है.

लोककथा के रास्ते एक दिन हो जाऊंगा स्मृति शेष

मुझे ख़ुशी है कि किसी भी वजह से आता है तुम्हारा ख़याल
जिसके भी किसी से हैं प्रेमपूर्ण संबन्ध, उसके पास पर्याप्त वजहें हैं रोने के लिए.

आज कल घरों की छतों को चूमते हुए चलते हैं बादल
चमकती रहती हैं बिजलियाँ रात और दिन
गरजती पुकारती स्मृतियों के झोंके उतने ही वाजिब है, जितनी वे पुरानी है.

इस बेवक्त के भीगे सीले मौसम में भी
अभी आया नहीं है वह दौर जब हर कोई अपनी पसंद की लड़की के साथ हो सके
इसलिए मेरी छोटी सी आत्मकथा को नीम बेहोशी में पढना कि
तुम इसमें हर उस जगह हो जहां लिखा है उम्मीद
और मैं वहां हूँ जहां लिखा है स्मृति शेष.

एक अरसे से सोच रहा हूँ कुछ महीनों के लिए छोड़ दूं पार्टी का दफ्तर
फ़िलहाल पेशेवर क्रांतिकारियों की जरुरत नहीं है
इसलिए तुम्हारे तवील बोसों की स्मृतियों में रहना कोई गुनाह नहीं है.

* * *

कल रात से लिखने की सब तरकीबें फ़ैल हो गई हैं. हाँ, कुछ ड्राफ्ट में इजाफा जरुर हुआ है. सुबह से ज़फर हुसैन खां साहब और साथियों को सुन रहा हूँ.


No comments:

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.