November 27, 2011

अनुपस्थिति


आज मैं तुमको जोर्ज़ बालिन्त की एक कहानी सुनाना चाहता था किन्तु जाने क्यों अब मेरा मन नहीं है. मैंने उस कहानी के बारे में अपनी लिखी हुई बीसियों पंक्तियों को ड्राफ्ट में छोड़ दिया है. मौसम में कोई रंगत नहीं है कि कुदरत के फ्रीज़र का दरवाज़ा अभी खुला नहीं है. मेरी अलमारी में अच्छी विस्की की बची हुई एक बोतल बहुत तनहा दीख रही है. नहीं मालूम कि हिना रब्बानी खान इस वक़्त किस देश के दौरे पर है और अमेरिकी सुंदरी कार्ला हिल्स ने उन्नीस सौ बानवे में जो कहा था कि हम दुनिया में शांति लायेंगे और सबको रहने के लिए घर देंगे, उसका क्या हुआ? फिर भी दिन ये ख़ास है इसलिए इस वक़्त एक बेवज़ह की बात सुनो.

दीवार की ट्यूबलाईट बदल गयी है सफ़ेद सरल लता में
और संवरने की मेज़ का आइना हो गया है एक चमकीला पन्ना.

मोरपंखों से बनी हवा खाने की एक पंखी थी
वो भी खो गई, पिछले गरम दिनों की एक रात.
मेरे सामने रसोई का दरवाज़ा खुला पड़ा है मगर जो चाकू है
वह सिर्फ़ छील सकता हैं कच्ची लौकी.

और भी नज़र जो आता है सामान, सब नाकामयाब है.

कि मेरी दो आँखों से सीने तक के रास्ते में
आंसुओं से भरा एक फुग्गा टकराता हुआ चलता है, हर वक़्त.

वह गयी तो साड़ी में टांकने वाली सब रंगीन सेफ्टी पिनें भी साथ ले गयी. 

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.