April 13, 2012

तूं सोया रह सकता है, उसके साथ...

कुछ ख़ुद को दी हुई सलाहें हैं बाकी ख़यालों के नक़्शे पर उभर आई उम्मीदों पर पड़े हुए दाग़ हैं. एक तूं हो नहीं सकता और तेरे सिवा कुछ भी नहीं...

रसायन के नियम
सब जगह नहीं आते काम
दिल के कीमियागर
सब चीज़ों को बदल देते हैं, अफ़सोस में.
* * *

दिल इतना बुद्धू है कि हर वक़्त
अहमक़ी दुनिया पर
फ़ाश करना चाहता है, अपना राज़.
* * *

वीराने की ओर लौटता हुआ तूफ़ान होता है
आदमी.

दिल के धड़कते ही चढ़ता है आसमान में
दिल के टूटते ही उतर आता है ज़मीन पर.
* * *

पी लो थोड़ी सी और गर बढ़ गया हो सवालों का बोझ
चलो लड़खड़ाते यूं कि लगे आहिस्ता नाच रहे हो तुम
कहो महबूब से कि तूं सोया रह सकता है, उसके साथ.

यूं एक बच्चे की तरह
हैरत से देखता है क्या, उम्र के इस मोड़ पर सोचता है क्या?
* * *
[Painting image courtesy : Judith Cheng]

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.