November 19, 2012

किसी हादसे की तरह

सड़क से ज़रा दूर ढलान में पड़ी हुई
एक बरबाद गाड़ी के ठीक बीच में
उग आए कंटीले झाड़
बख्तरबंद लोहा हो गया जंगल का हिस्सा।

कोई चला गया किसी हादसे की तरह
उगते रहे सन्नाटे के बूटे, याद के कोमल कांटे
उदासी के आलम ने रंग लिया, अपने रंग में।
* * *

वक़्त का लम्हा भूल गया उस रिश्ते की मरम्मत करना। एक ने मुड़ कर नहीं देखा, दूसरे ने आवाज़ नहीं दी। इसलिए सफ़र के अनगिनत रास्ते हैं कि कोई भी जा सकता है किधर भी, वादा सिर्फ दिल के टूटने तक का है। रिश्तों की रफ़ूगरी भी कोई अच्छा काम है क्या? 


सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.