February 6, 2017

शर्त जो उसने रखी


ससुराल से आई मीठी बूंदी खा रहा हूँ। जितनी मीठी है उतनी ही सुन्दर भी। ज्यादातर पीली है मगर कुछ एक रानी रंग की भी है। इसी बूंदी में कुछ एक टुकड़े जलेबी के भी हैं। मैंने पक्का कर लिया था कि एक भी बूंदी गिरने न पाए। लेकिन ध्यान भंग हो रहा है। कुछ एक नीचे गिर रही हैं।

मैं आस-पास देखता हूँ कि कोई है तो नहीं? फिर उसे उठाकर छोटे बच्चे की तरह फूंक मारकर मुंह में रख लेता हूँ। फिर आस पास देखता हूँ कि किसी ने देखा तो नहीं फिर मुंह चलाना शुरू करता हूँ।

मेरे साथ एक लड़का पढ़ता था। वह अपना लंच लेने के लिए किसी एकान्त में जाता था। वहां वह उसे धीरे धीरे खाता था। खाते समय कहीं खो जाता था। जब भी वह देखता कि कोई उसे खाते हुए देख रहा है, वह लंच बॉक्स को बंद कर देता था।

एकान्त, आपकी याददाश्त की मरम्मत करता है।
* * *

मैंने मुल्तवी कर दिया
पूछना उसका नाम।

शर्त जो उसने रखी, बेजा न थी।
* * *

छीजने की आहट

मन एक तमाशा है  जो अपने प्रिय जादूगर का इंतज़ार करता है। शाम से बालकनी में बैठे हुए सुनाई पड़ता है। तुम कितने कोमल हो सकते हो? खुद से पूछने पर...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.