October 11, 2017

दूर से आते हुए पिता

पहले तो दिख जाते थे
दूर से आते हुए पिता।

अब धुंधला जाती हैं आंखें
भरी-भरी गली में
नहीं दिखता उनका आना।

कभी-कभी
इससे भी अधिक उदास हो जाता हूँ।

उन पिताओं के बारे में सोचकर
जो इसी तरह जा चुके बच्चों का
भूल से करने लगते होंगे, इंतज़ार।
* * *

मैं सो नहीं सकता हूँ
कि मैं सो गया तो
कौन जागेगा तुम्हारी याद के साथ?

तुम्हारे बिना
इस खाली-खाली दुनिया मे
कितनी तन्हा हो जाएगी तुम्हारी याद।
* * *

सर्द रात

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Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.