November 7, 2017

ख़यालों के अंडरपास

दो साल पहले उसने कहा- "मानव इज हॉट।" फिर मेरी आँखों में झांकते हुए कहा- "बट मिलिंद इज मिलिंद। ही इज अ माचोमैन..." उसके होठों पर मुस्कान और आंखों में शरारत भरी थी।

"अच्छा इस बार मानव कौल दिल्ली आए तो उससे मिलवाना।"
मैंने कहा- "मानव मुझे नहीं जानते"
"रहने दो। ही इज इन योर फ्रेंडलिस्ट एंड रेस्पोंडिंग टू यू"

मैंने देखा कि उसे मेरी बात का यकीन न था। साथ बैठी व्हिस्की पी रही ख़ूबसूरत दोस्त को उदास करना अच्छा न था। इसलिए मैंने कहा- "ठीक है।

साल भर बाद उसने कहा- "बुक फेयर में आये हो मिलोगे?" मैंने कहा कि दिल्ली में मेरा फोन नहीं लगता। बैटरी ड्रेन हो जाती है। नेट पुअर होता है इसलिए मैं वहीं मिलूंगा। न मिलूं तो हिन्द युग्म के स्टाल पर पूछना।"

उसे अच्छा न लगा। ये दोस्त होने जैसा भी न था कि ऐसे तो कोई भी मिल लेगा। वह नहीं आई। मेरे पास भी मेले में वक़्त न था। अचानक उसका मेसेज आया। "शाबाश। मानव कौल का इंटरव्यू कर रहे हो और बड़ी भीड़ लगा रखी है। बहुत अच्छा।"

इस बार मिले तो हम फिर व्हिस्की पी रहे थे। फिर अचानक उसे याद आया। उसने फोन को ऑन किया और दिखाया। "शिट। लुक दिस पिक। मिलिंद अट्ठारह साल की लड़की से डेट कर रहा है।" मैंने उदास मुंह बनाया और कहा। "वह लड़की तुमसी सुंदर भी नहीं है"

फिर हम थोड़ा ज्यादा मुस्कुराए।

कार में कोई एफएम चल रहा था। विद्या बालन कह रही थी मैं हूँ तुम्हारी सुलु... हम दोनों ने एक दूजे की ओर देखा। कहा किसी ने कुछ न था मगर देखने का अर्थ था कि मानव को भी जाने दो। कोई और देखेंगे। इसी चुप्पी में मैंने चाहा कि काश इस रास्ते में फिर से अंडरपास आएं। उनसे गुज़रते हुए ऐसा लगता है जैसे दुनिया ऊपर रह गयी है। हम कहीं गुप्त रास्ते से किसी दूसरे देश जा रहे हैं।
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लव यू मिलिंद। हमतो तुम्हारे चाहने वाले हैं इसलिए रश्क करते हैं। बाकी दिल यही कहता है कि हर कोई उसके साथ हो सके, जिसकी चाहना हो। आमीन।
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[Photograph by Harold Ross]

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.