October 12, 2018

कोई यायावर अचानक पास आ बैठा



दो टहनियां हवा के साथ आपस में एक दूजे से लिपटी।
चर्र की हल्की आवाज़ आई। जैसे सावन के मौसम में भीगी चारपाई पर कोई आकर बैठ गया।
जैसे किसी ने आधी रात चुपके से उढके हुए दरवाज़े को खोला।
"क्या सचमुच अब किसी के दबे पांव चलने की आवाज़ आएगी?"
मेरे इतना सोचने भर से अंधेरे में रूमान झरने लगा। सहसा कंधे पर छुअन जगी।
आह! ये पेड़ से झड़ी दो सूखी पत्तियां थीं।
जितना मेरा कासा सूखा था, जितनी मेरे मुंह में प्यास थी, जितना किसी का होना, न होने में बदल गया था।
ठीक वैसा था सूखी पत्तियों का स्पर्श।
डब-डब की चार-छह आवाज़ों से मैंने कासे में गीलापन उड़ेल दिया।
जैसे कोई यायावर अचानक पास आ बैठा है और मैं उसके चोर दांत देख रहा हूँ।

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.