October 15, 2018

तुम अभी थोड़ी देर पहले यहीं थे



हरे, पथरीले पहाड़ी या मैदानी रास्तों पर चलते हुए मैं उन रास्तों को पहचान लेता हूँ, जहां से तुम गुज़रे थे।

पदचिन्ह ही अकेली चीज़ नहीं होती जिससे किसी के गुज़रने का पता मिलता हो। ख़ुशबू को भी हवा अक्सर उड़ा ले जाती है। पेड़ों के तनों पर खुरचे गए नाम और निशान भी बेढ़ब हो जाते हैं। इन सब के बिना, बिना कुछ देखे मुझे अचानक लगता है कि तुम यहां से गुज़रे थे। तुम पूछोगे कैसे तो मैं उलझन में घिर जाऊंगा कि क्या कहूँ कैसे मालूम होता है? मगर होता है।

कभी ये भी लगता है कि तुम अभी थोड़ी देर पहले यहीं थे। मैं ठहरकर तुम्हारे होने को महसूस करने लगता हूँ।



सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.