November 5, 2018

मेरी धंधे पर नज़र है

एक करोड़ नौ लाख पाठक क्या पढ़ते होंगे सोचिये। व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी को कोसते न रह जाना। महान होने को दिखावा करने वाले इन दम्भी व खोखले समाचार पत्रों का हाल भी लेते रहना। शेर ठीक याद नहीं और शायर का नाम भूल गए। वैसे भी कलियुग के बाद चौर्ययुग चल रहा है। झूठ भाषण इस युग की आत्मा है। और फिर बशीर बद्र साब अपनी याददाश्त खो ही चुके हैं।

जिस दिन से चला हूँ मेरी मंज़िल पे नज़र है
आँखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा। 
~ डॉ बशीर बद्र


सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.