February 2, 2019

कभी लगता है



सोचता हूँ कि इस समय गहरी नदी के बीच हिचकोले खाती नाव होता। डूबने और पार उतरने की आशंका और आशा में खोया रहता। जीने की इच्छा के सिवा बाकी यादें कहीं पीछे छूट जाती। मैं मगर सूखी नदी के तट पर पड़ी एक जर्जर नाव हूँ।

कभी लगता है बड़ी उदास बात है और कभी-कभी लगता है इससे अधिक सुंदर बात क्या हो सकती है?


सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.