February 5, 2020

हालांकि हम क्या बात करते

संदेशे छूटते जाते हैं। बात करना कल तक के लिए टल जाता है। जाने कौनसा कल। बस एक ख़याल दस्तक देता रहता है कि आवाज़ अभी तक न सुनी जा सकी।

हालांकि हम क्या बात करते?

इस तस्वीर को अगर तुम पढ़ सको तो यही लिखा है कि कलाकार स्टूडियो से बाहर हैं। साज़ बेतरतीब रखे हैं। साज़ के कवर घिस चुके हैं। स्टूडियो की दीवारों पर अनगिनत स्याह तारे टिमटिमाते हैं। और मैं सोच रहा हूँ कि तुमको पहली बार देखा था तो मैंने क्या किया।

पखावज से निकले दीर्घ स्वर की लोप होती हुई स्मृति की तरह मैं ओझल हो रहा था। धीरे धीरे डूब रहा था।

इसके बाद मुझे लगा कि तुम तक जाना चाहिए लेकिन ये न लगा कि तुमको बताना चाहिए कि मैं यहां क्यों आया हूँ। इसलिए केवल कहानियों की बातें ही ठीक थी। लेकिन क्या मैं तुम तक आया था?

एक उजली लौ असंगत नाचती है। मैं चुपचाप देखता हूँ। जैसे तुमको देखा था।

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.