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ब्रिटनी मर्फी और ये याद का टीला

क्रश... क्रश... क्रश.. काश, लोबान की गंध से बचा रहूँ.

धोधे खां की बकरियां और विभूति नारायण राय

मैं कब ज़िन्दगी को तरतीब में रखना सीखूंगा, एंथनी !

शामें सुस्त है मगर बोझिल नहीं

एक आत्ममुग्ध बयान और कुछ भड़वे

कुत्ते, तुम रोते क्यों हो यार ?

भाई, मैं बहुत प्यार करता हूँ तुमसे अगर मर जाऊं तो ये याद रहे.

ईश्वर, दोस्तों को मुहोब्बत से पहले यकीन दे या पीना सिखा दे

अलग किस्म की याद जैसे 'साही' की पीठ पर काला सफ़ेद तीर

स्त्री तुम सदा सुहागन रहो, अभी हमारे पास दूसरे काम हैं...