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थोड़ी सी शराब और बहुत सा सुकून बरसे...

घर से भागी हुई दुनिया

गलियों की लड़की मैगी और रेत में मशालें

पेंसिलें

खेत में धूप चुनती हुई लड़कियां

और अब क्या ज़माना खराब आयेगा

रास्ते सलामत रहें

भूख आदमी को छत तक चढ़ा देती है

यही मौसम क्यूँ दरपेश है ?

ओ वादा शिकन...

इन आवाज़ों को शक्ल मिलने की दुआ करता हूँ