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प्रेम का कोई तुक नहीं होता

आग के पायदानों पर बैठी स्वर्ण भस्म

औरत की जगह

तेरी ही तरह सोचता हूँ कि गुमख़याल हूँ.

वह एक भयंकर ईश्वर था.

टिमटिमाती हुई रोशनियों में

तेरे खाके भी मेरे पास नहीं रह सकते...

जली तो बुझी ना, कसम से कोयला हो गयी हाँ...

सब अक्षर धुल जायेंगे...

बस ख़ुदा का शुक्र है...

ऐ दुनिया, अपनी दुनिया ले जाओ...