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रंग, राख़, पानी और धूप जैसी चीज़ें

कितना सूखा है, देखो ना

काल और क्षय से परे

ये सिस्टम किसका सिस्टम है?

मैं उस रोशनी में जाकर क्या करूंगा

और कुछ याद, दाल और तुरई की

रेगिस्तान के किसान, रिफायनरी और शुभचिंतक नेता

एक मरा हुआ आदमी कई बार सचमुच मरा हुआ नहीं होता है।

तो उसकी दुनिया कहाँ गई?

तस्वीर अधूरी है मगर मिटी तो नहीं है

बीते गुरुवार की शाम