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हथकढ़
[रेगिस्तान के एक आम आदमी की डायरी]
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June 30, 2011
दोपहर के वक़्त का टुकड़ा...
June 25, 2011
ख़ूबसूरती का ख़याल और बेसलीका बातें
June 22, 2011
सलेटी रंग पर कढ़ाई
June 13, 2011
क्या बुझेगा राह से या सफ़र बुझ जायेगा
June 10, 2011
प्रेम का कोई तुक नहीं होता
May 25, 2011
आग के पायदानों पर बैठी स्वर्ण भस्म
May 20, 2011
औरत की जगह
May 18, 2011
तेरी ही तरह सोचता हूँ कि गुमख़याल हूँ.
May 16, 2011
वह एक भयंकर ईश्वर था.
May 11, 2011
टिमटिमाती हुई रोशनियों में
May 06, 2011
तेरे खाके भी मेरे पास नहीं रह सकते...
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