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कुछ शामें भूलने लायक नहीं होती

तुझको छू लूं तो फिर ऐ जान ए तमन्ना

बारिशें, तुम्हारे लिए

तेरे भीगे बदन की खुशबू से

काश, इतना सा हो जाये

मदहोशी में, होश है कम कम

कौन गुज़रा था अभी..

दुखों पर ही अपना घर...

सितमगर कभी तेरा यूं देखना

तपते दिन में गीली जगह

ख़यालों की छाया का नाच