May 12, 2012

ख़यालों की छाया का नाच


तुम्हें मालूम हो शायद कि प्रेम रेगिस्तान का दीवड़ी भर पानी है. इसके लिए पीछे लौटना मना है कि आप खो देते हैं सफ़र का साहस. जो तपती रेत पर चलते रहते हैं. वे एक दिन सीख जाते हैं. आंसुओं के बादलों के बीच अनेक दर्द से एक इन्द्रधनुष बुनना. इस ज़िंदगी के काँटों के बीच से छनते हुए नूर की छाप हर सुबह जब धरती पर गिरती है उस वक्त छलनी हुआ दिल याद आता है. कि सब लोगों के हिस्से में जो रखा है वह उसी सवाल के जवाब का इंतज़ार है. जिसे महबूब ने अनदेखा कर रखा है. उसने जाने किसलिए नज़रें फेर रखी है कि उसे मालूम ही नहीं इंतज़ार एक उम्र भर का काम होता है. इंतज़ार उम्र के बंधन से परे है. ख़यालों की छाया का नाच यानि एक बेवजह की बात...

मेरी ये फ़िज़ूल की बात
एक दिन लिखी होगी किसी किताब में
कि हर बार बिछड़ते वक़्त
सुबह होने से पहले की घड़ी में शैतान
दोनों हाथों को विशाल परों की तरह हिलाता है
और बहने लगती है जादुई हवा
कि वह लौट रहा होता है, महबूबा से मिल कर.

वह बचाए रखता है दुनिया का भरम
कि हर लड़की अच्छी है
और उसे हक़ है कि कर सके किसी से भी मुहब्बत.

* * *
[Painting The  Never ending gossip's image, courtesy : Tamanna Sagar ]

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.