September 3, 2011

आज की एक रात रुक जाओ...

ढोला तमीणे देस में म्हें दीठा तीन रतन, एक ढोलो दूजी मरवण तीजो कसूम्बल रंग !

ओ माणीगर रेवो अजूणी रात, पूछों रे मनडे़ री बात
माणीगर रेवो अजूणी रात
थांरे कारणिये ढो़ला जीमणियो जिमाऊं, जीमणिये रे मिस आवो रे बादिला
माणीगर रेवो अजूणी रात, पूछों रे मनडे़ री बात
थांरे कारणिये केलूडी़ रोपाओं, दांतणिये रे मिस आवो रे बादीला
माणीगर रेवो अजूणी रात, पूछों रे मनडे़ री बात...

ओ प्रिये तेरे देश में मैंने तीन रत्न देखे हैं, एक प्रिय दूसरी प्रियतमा और तीसरा कसूम्बल रंग

ओ सौदागर आज की एक रात रुक जाओ तो मन की बात पूछूं
आपके लिए एक भोज का आयोजन करूँ, भोजन के बहाने से आ जाओ ओ हठीले
ओ सौदागर आज की एक रात रुक जाओ...
आपके लिए केलू का पौधा लगवा दूँ, दातुन के बहाने से आ जाओ ओ हठीले
ओ सौदागर आज की एक रात रुक जाओ...

रेगिस्तान में रात जब लाल रंग में घिरने लगती है तो उसे कसूम्बल रंग कहते हैं. मैं ऐसे ही रंग की रातों को ओढ़ कर सो रहा हूँ. विरह की उदासी से घिरी बैठी किस प्रेयसी ने ऐसे लोक गीतों को जन्म दिया होगा कि ज़िन्दगी बस उसके साथ की एक रात का ख़्वाब बन कर रह गयी. गफूर और उसके साथियों के गाये इन लोकगीतों में सुकून है. जिस दिन तुम्हें भूल जाऊँगा उस दिन कहूँगा. गफूर अब तुम घर जाओ, इन गीतों को किसी और के लिए रख लो !

मैं दिल को लाख समझाता हूँ. उसको हज़ार ऐसे किस्से सुनाता हूँ कि तुमसे दिल टूट जाये. ये मेरी सुनता ही नहीं. आज की रात जितनी पी सकता हूँ उतनी शराब पीने के लिए तय है कि मैं बहुत थक गया हूँ.


No comments:

छीजने की आहट

मन एक तमाशा है  जो अपने प्रिय जादूगर का इंतज़ार करता है। शाम से बालकनी में बैठे हुए सुनाई पड़ता है। तुम कितने कोमल हो सकते हो? खुद से पूछने पर...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.