April 12, 2020

वैसा दिखता होगा प्रेम

एक बार मैं प्रेम के बारे में सोचने लगा। कि प्रेम कैसा दिखता होगा। माने शक्ल सूरत नहीं। उसकी उपस्थिति कैसी होगी। सुंदर और प्रिय नहीं वरन वह है ये कैसे कह जा सकता है।

मुझे याद आया कि प्यास की गहराई अद्भुत होती है। वह जब हमको बांहों में भर लेती है तब आसानी से मरने नहीं देती। पहले पहल तलब होती है। उसके बाद बेचैनी। फिर सूखे होंठ कांपने लगते हैं। आवाज़ खो जाती है। इसके बाद नीम बेहोशी आने लगती है। अंततः प्यास जीत जाती है।

ऐसी प्यास को जो बुझा सके, वैसा ही तो दिखता होगा प्रेम। इसलिए मैंने लिखा कि पानी से भरे हुए चड़स जैसा दिखता है प्रेम। हर हिलकोरे के साथ ज़रा सा हिलता हुआ। हर आहट पर चौंकता हुआ।
* * *

तस्वीर - कुछ बरस पहले की एक दोपहर - छोटा भाई महेंद्र आराम करते हुये।

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.