April 2, 2020

सड़कें सूनी है


कागज़ का कोई कप भूले से सड़क पर दिखाई देता है। रेलवे ट्रेक खाली पड़ा है। फाटक का चौकीदार नहीं है। फाटक बंद करने वाली गुमटी पर ताला लगा हुआ है।

पुलिस वाले कियोस्क के बाहर और भीतर मास्क लगाए खड़े हुए हैं। हाट बाजार जैसी सब्ज़ी की दुकानों की कतार सजी है। लोग मास्क लगाए हुए सब्ज़ी खरीद रहे हैं। फल ठेले वाले ठेले पर बनाई छाया के नीचे मुँह ढके बैठे हुए हैं।

स्टेशन रोड जाने वाले रास्ते पर बेरिकेड्स लगाए हुए हैं। जूते गांठने वाले मोची गायब है। उनकी जगहें खाली पड़ी हुई है। कोई गाड़ी सड़क पर आती है तो पुलिस वाले नज़रें उठाकर देखते हैं।

सड़कों पर फैला रहने वाला पानी नहीं है। कलेक्टर बंगले के आगे बहने वाला सदाबहार प्रवाह सूख चुका है। जल विभाग का ओवरफ्लो एक पुरानी बात हो गया है। कुछ दिन पुरानी बात।

मैं धीमे कार को आकाशवाणी की ओर बढ़ने देता हूँ। पुलिस लाइन के आगे कुछ एक किराणा की दुकानों पर ऊँघे लोग खड़े हैं। जेल तक आते ही बासी भोजन की सड़ाँध से दो चार होना चाहता हूँ मगर वह गन्ध नहीं मिलती।

गोबर एक लगभग विलुप्त हो चुकी बात हो गयी है। सड़कों पर बैठे रहने वाले आवारा पशु गायब हैं। उनका इस तरह कहीं चले जाना मुझे उदास करता है कि दिन रात आदमी के फैलाये कचरे को चबाने वाले जीव जाने कहाँ चले गए हैं।

क़स्बा बदल गया है।

आकाशवाणी के द्वार पर रुक कर बड़ा दरवाज़ा खोलता हूँ तो हवा के साथ उड़ती नीम की पत्तियां पांवों में चली आती हैं। एक सुनहरी चादर है। एक अखबार उड़ता है तो तेज़ आवाज़ आती है।

पहले माले पर लगे कूलरों पर कबूतर झगड़े कर रहे हैं। उनके पंखों से शोर जागता है लेकिन कोई और आवाज़ें नहीं हैं, जिनमें वह शोर खो सके।

स्टूडियो में सन्नाटा है। इंजीनियर शहर के बाहर बने ट्रांसमीटर चले गए हैं। वे मुझसे कह कर गए हैं कि कंट्रोल रूम से स्टूडियो का चेंज ओवर आप खुद ले लेना।

मैं एक फ़ोन रिकॉर्ड करने लगता हूँ। मैं पूछता हूँ डॉ साहब कैसा लगता है रोज़ अस्पताल आना। वे जवाब देने लगते हैं। उनको सुनते हुए अपने इस बेकार सवाल पर मुस्कुराता हूँ कि सड़कों पर पुलिस वाले भी रोज़ ड्यूटी पर आ रहे। बिजली-पानी वाले भी नौकरी पर हैं। मैं भी सुबह से शाम स्टूडियो में बैठा फ़ोन रिकॉर्ड करता और प्ले करता रहता हूँ।

असल में मुझे उस आदमी को फ़ोन करना चाहिए जो पिछले दस दिन से दिहाड़ी पर नहीं जा पाया है। उसका क्या हाल है। उसके लिए क्या किया जा सकता है।

मेरे पास उसका नम्बर नहीं है।

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.