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असमाप्य बिछोह के रुदन का आलाप

मार गिराता हूँ दिन और रात

दुछत्ती से उलटा लटका मकड़ा

शायर और अफ़साना निगारों के बारे में कुछ झूठी बातें।

सब चारागरों को चारागरी से गुरेज़ था

कुदरत ने बख़्शी है मुझे खुशियाँ

कई दफ़ा और रूआँसा लड़की

तुम्हारा इंतज़ार है...

हम जाने क्या क्या भूल गए

मैं तुम्हारी ही हूँ

वक़्त के होठों पर एक प्रेमगीत