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अचम्भे की बरत की तरह

प्रेम करने के ख़याल की ख़ब्त

यादों की सुरंगें

असल में कुछ नहीं हूँ मैं

ख़यालों के अंडरपास

बस एक बार के लिए

हम फिर मिलते हैं

कि कहां तक

बहुत दिनों बाद अनायास

क्या होगा सोचकर

याद करते हुए एक बरस