May 7, 2012

कभी सोचो इस तरह


एक नेक सलाह ख़ुद के लिए लिखी है, भले ही कुछ भी बदलता नहीं है. अक्षर अक्षर मांडना, साँस साँस सोचना कि कितना सफ़र बाकी है. फिर उम्मीद भी कि दिमाग एक दिन भूल जायेगा सब वस्ल और फ़िराक की बातें. फ़िलहाल सब कविता-कहानी नाकाम, सब मुश्किल, सब हैरान और सब परीशां...

कभी सोचो इस तरह
कि ऐसी भी क्या बात टूटी है तुम पर
हर कोई उठाता है दुःख
मगर फिर भी हर कोई करता है प्रेम
कि हर किसी को मुश्किल है ज़िन्दगी.

खुश हो जाया करो, आंसू बहाने के बाद
कि तुमने देखा है किसी दीवार को
मौसमों के सितम पर बहाते हुए आंसू.

कि हज़ार मुश्किलों के बाद भी
कुछ चीज़ें रो नहीं पाती हैं उम्र भर.
***

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.