May 9, 2017

उसी की शर्तों पर




प्रेम को लाख सरल कहो, मगर हज़ार आफ़तें हैं।

बोरोसिल का ग्लास खाली हो तो लुढ़क जाता है। अगले झौंके में चप्पल उड़ जाते हैं। ज़रा और बेख़याल रहो तो स्नेक्स का डिब्बा लुढ़कने लगता है। पूनम की रात है। हवा तेज़ है।

रेगिस्तान में उसी की शर्तों पर जीना पड़ता है।

[Painting courtesy : Jill Karsner]

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.