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किसी ज़ीने पर पुराने दिन बैठे होते...

क़ैदख़ाने में सुंदर पीठ वाली लड़की

मरक़दों पे तो चिरागां है शब-ओ-रोज़

आज की एक रात रुक जाओ...

कोई भुला भी न सके...

ऐ ज़िन्दगी गले लगा ले

ये सूरत बदलनी चाहिए...

बिसात-ए-दिल भी अजीब है

अबूझ और उदास सपनों की रातें

ऐ दोस्त तेरे लिए !

एक उड़ने वाला गाँव