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तामीर में शामिल एकाकीपन...

उदासी, बहुत सारी बेसबब उदासी...

ओ लड़के...

गिर गया, चाँद सा कंघा मूमल के केश से

ताम्रपत्र सरीखा है, मोरचंग

उस बज़्म में हम...

घास की बीन

हसरतों के बूमरेंग

शाम के टुकड़े

मर जाने से बहुत दूर

डिस्क्लेमर : कहना गलत गलत