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वो नाकाफी था

आवाज़ दूँ या नहीं

किस तरह, किस के प्रेम में पड़े

कोई बात है मगर क्या?

ठहरी हुई सतर

लेकिन नियति।

ये मैं ख़ुद नहीं जानता

इक सिहरन

कभी दूर तक साथ पैदल चलने

जालीदार रोशनी के पास

भूलने का सबसे बढ़िया तरीका