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हथकढ़
[रेगिस्तान के एक आम आदमी की डायरी]
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December 09, 2018
हो तो फिर
नदी में ठहरी रहे कोई नाव
पोखर के पानी पर पड़ा हो सूखा पत्ता
रेत के धोरे पर हो सोनल घास का बूंठा
तब ही सुंदर लगता है किसी का इतना बड़ा होना।
दिल पर भी होना चाहिए कोई ज़ख्म।
* * *