March 27, 2020

इन दिनों की याद


बिल्ली हेजिंग के पास पीठ के बल लेटी है। मैं मुख्य द्वार के पास लोहे की लंबी बैंच पर बैठा हूँ। हम दो ही हैं। बाकी दफ़्तर में सन्नाटा पसरा है। मैं बिल्ली को देखता हूँ और वह मुझे देखती है।

विंक पर बहादुर शाह ज़फ़र की ग़ज़ल प्ले कर ली है। मेहदी हसन गा रहे हैं। बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी।

तस्वीर थोड़ी देर पहले स्टूडियो में ली थी। इन दिनों की याद की तरह बची रहेगी।

सर्द रात

एक सस्ती सराय के कमरे में रात दूसरा पहर ढल गया था। मेज़ पर मूंगफली और निचुड़े नींबू पड़े थे, वह सो चुका था।  लिफाह बेहद ठंडा था। ओलों के गिरने ...

Hathkadh । हथकढ़

हथकढ़, कच्ची शराब को कहते हैं. कच्ची शराब एक विचार की तरह है. जिसका राज्य तिरस्कार करता है. इसे अपराध की श्रेणी में रखता है. राज्य अपने जड़ होते विचारों के साथ जीने की शर्तें लागू करता है. मेरे पास विचार व्यक्त करने का कोई अनुज्ञापत्र नहीं है. इस ब्लॉग पर जो लिखता हूँ, वह एकदम कच्चा और अनधिकृत है. मेरे लिए ये नमक का कानून तोड़ने जितना ही अवैध है.