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कौन गुज़रा था अभी..

दुखों पर ही अपना घर...

सितमगर कभी तेरा यूं देखना

तपते दिन में गीली जगह

ख़यालों की छाया का नाच

वह दिन कभी नहीं आएगा

कभी सोचो इस तरह

एक दिन सब कुछ हो जाता है बरबाद

आओ, बैठो इस पास वाले स्टूल पर

ज़िन्दगी का हाथ बड़ा तंग है...

गठरी में भरी अकूत कल्पनाएँ...